।। श्रीमते रामानुजाय नम: ।।
सनातन धर्म संस्कृत विद्या के दुरूह विषयों एवं संस्कृति के संरक्षणार्थ ‘श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय काशी, मिश्रपोखरा, वाराणसी’ के संस्थापन का उद्देश्य
श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय काशी, मिश्रपोखरा वाराणसी का संस्थापना वर्ष १९४५ में संस्कृत (देवभाषा) एवं सनातन संस्कृति के उन्नयनार्थ वेद-वेदाङ्ग के प्रचारार्थ भारत के हृदयभूत त्रैलोक्य पावनी काशी के दूध विनायक वाराणसी में श्री मद्वेदमार्ग प्रतिष्ठापनाचार्य, उभयवेदान्तप्रवर्त्तकाचार्य जगद्गुरु भगवद्रामानुजाचार्य, काशीपीठाधीश्वर श्री श्री १००८ श्री देवनायकाचार्य श्री महाराज के द्वारा किया गया। वर्तमान में स्थान परिवर्तन करके वर्ष १९७० में महाविद्यालय को वेंकटेश भवन डी. ४८/१५७ मिश्रपोखरा वाराणसी में प्रतिष्ठित करके संचालित किया गया। सनातन धर्म के वास्तविक मूल स्वरूप के संज्ञान के निमित्त वेद-वेदाङ्गों के अध्ययन की आवश्यकता है। अत: महाविद्यालय में साहित्य-व्याकरण-वेद-ज्योतिष-मीमांसा-न्यायशास्त्र वेदान्त जैसे शाज्र्र-रामानुज-द्वैत-अद्वैत विशिष्टा द्वैत वेदान्त का ज्ञान पुराण एवं आधुनिक विषय जैसे हिन्दी-अंग्रेजी-समाजशास्त्र-सङ्गणक एवं योग इत्यादि विषयों की मान्यता प्राप्त है। जिसमें छात्र अध्ययनरत होकर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से सम्बद्ध होकर परीक्षारत रहते हैं। सूदूर प्रान्तों एवं अन्य देश से समागत छात्र यहां विविध विषयों की शिक्षा प्राप्त करते हैं। यहां के पठित छात्र विविध महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में जाकर शिक्षण कार्य करते रहे हैं और वर्तमान में संस्कृत एवं संस्कृति के तत्त्वों का उत्कृष्ट ज्ञान प्रदान कर रहे हैं।
रामायण-श्रीमदभागवत् आदि समस्त पुराणों का प्रवचन एवं प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और भारतवर्ष को ज्ञान समन्वित विश्वगुरु बनानें के लिए निरन्तर प्रयासशील हैं। इतना ही नहीं, इस महाविद्यालय से शिक्षारत विद्यार्थी, राजकीय सेवा में एवं राष्ट्र के रक्षार्थ सेना में जाकर धर्मगुरु इत्यादि पदों पर सेवारत होकर समाज की सेवा एवं उन्नयन में निरन्तर प्रयतमान हैं। ऐसे छात्र चाहे आर्थिक रूप से सम्पन्न हो या विपन्न, इस महाविद्यालय में आवासीय रूप में रहकर विद्वानों से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस महाविद्यालय में ५० छात्रों के आवास का स्थान है, जिसमें छात्र गुरुकुल की पद्धति से आचार्यों से शिक्षा प्राप्त करके वेद-वेदाङ्ग, कर्मकाण्ड, ज्योतिष, रामायण, दुर्गा, भागवत आदि का प्रचार प्रसार निरन्तर कर रहे हैं। समाज में अधिकांश जन संस्कृत-संस्कृति एवं सनातन धर्म के उन्नयन हेतु सहयोग देने की आकांक्षा रखते हैं। वर्तमान में यह महाविद्यालय इनकम टैक्स अर्थात आयकर अधिनियम की धारा ८० ‘जी’ एवं १२ ए के द्वारा आच्छादित एवं करमुक्त है। जिसके अन्तर्गत आप पुण्य के लाभार्थी जन महाविद्यालय के नाम चेक द्वारा या वैâश प्रदान कर सहयोग की रसीद प्राप्त कर सकते हैं। आशा है कि आप पुण्य के लाभार्थीजन संस्कृत एवं संस्कृति के सम्बर्द्धन में निर्धन छात्रों के पोषण एवं सहयोग में, अपने धन को उत्तम गति प्रदान करने के निमित्त सहयोग प्रदान कर अक्षय पुण्य के भागी बनने का सत्प्रयास करेंगे।
डॉ. परमेश्वर दत्त शुक्ल
संरक्षक
श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय, काशी
मिश्रपोखरा वाराणसी